ग़ज़ल-----दर्द किसको यहां अब बताएंगे हम
दर्द किससे यहां अब बताएंगे हम
कौन सुनता है किसको सुनायेगे हम
तुम तो तन्हा मुझे छोड़ कर रह लिये
इस अंधेरे को कैसे दिखाएंगे हम
जिंदगी के कई मोड़ देखे हैं तो हैं
सोचकर बस यही भूल जाएंगे हम
दिल तुम्हें ढूंढता है मगर क्या करें
रास्ता भी नहीं कैसे पाएंगे हम
इश्क का एक दीपक मेरे हाथ में
तेरी चाहत में उसको जलाएंगे हम
तुम समझने की कोशिश किए भी नहीं
किस तरह जिंदगी अब बिताएंगे हम
तुम मुझे आजमाते रहे उम्र भर
अब तुम्हें भी ज़रा आजमाएंगे हम
आलोक रंजन इंदौरवी
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