ग़ज़ल,,,,,,,
तुम मिले जब से मुझे मौसम सुहाना हो गया
जिंदगी जीने का इक सुंदर बहाना हो गया
जिस नजर नें तुमको देखा वो दीवानी हो गई
और मैं भी जानें क्यूं तेरा दीवाना हो गया
अब तो बस उसके खयालों मेंहीखोयारहताहूं
आजकल इस दिल में उसका आना जाना हो गया
दोस्ती की शर्त हम दोनों निभाये इस तरह
दायरे में रहके मर्यादा निभाना हो गया
ख्वाब की दुनिया धरातल पर उतरती जा रही
एक दूजे के लिए प्यारा ठिकाना हो गया
जब मिले हम तुम तो जानें किस जहां में खो गए
वक्त ठहरा सा लगा हर गम भुलाना हो गया
मेरे दिल पर हाथ रख कर तुम भी धड़कन सुन लिए
तेरा मेरा साथ उस दिन आशिकाना हो गया
आलोक रंजन इंदौरवी
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