यही है भारत देश महान
जिस धरती का कण कण बोले, राम और घनश्याम
यही है भारत देश महान
गंगा यमुना की लहरों से, सिंचित जिसका प्राण यही है भारत देश महान
रामकृष्ण का गुंजन होता, देवों का अभिनंदन होता
पावन धरती की रज लेकर, सब के माथे चंदन होता
वेदर ई चाहे झंकृत होती, करती है गुणगान यही है भारत देश महान
आदि सनातन धर्म हमारा, शुभ कर्मों का संचय सारा
गौरवशाली संस्कृति अपनी, हमने इस पर तन मन वारा
प्रकृति प्रदत्त खजाना अपना, करते अनुसंधान यही है भारत देश महान
ब्लू पवन है ध्वजा पताका, फैले हरियाली बनकर
पर्वत की चोटी लहरा कर, रहती मतवाली बनकर
ऊंचा शिखर हिमालय अपना बना हुआ अभिमान, यही है भारत देश महान
आलोक रंजन इंदौरवी
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