ग़ज़ल। आपके कितने दीवाने हो गए

आपके कितने दिवानें हो गए
मेरे  जैसे  कुछ  पुरानें हो गए

ढूंढते रहते हैं फिर भी आप कुछ
आजकल कितने बहानें हो गए

एक छतरी में चले हैं दस कदम
आज फिर मौसम सुहानें हो गए

बाद मुद्दत हमनें देखी बस्तियां
महल जैसे  शामियानें  हो  गए

जब बदलने ही लगी तकदीर तो
उनके दिल में भी ठिकानें हो गए

आलोक रंजन इंदौरवी

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

कविता आलोक रंजन इंदौरवी

ग़ज़ल-----दर्द किसको यहां अब बताएंगे हम

ग़ज़ल,,,, तबीयत जिस पे आ जाए वही दिलदार होता है।