ग़ज़ल। आपके कितने दीवाने हो गए
आपके कितने दिवानें हो गए
मेरे जैसे कुछ पुरानें हो गए
ढूंढते रहते हैं फिर भी आप कुछ
आजकल कितने बहानें हो गए
एक छतरी में चले हैं दस कदम
आज फिर मौसम सुहानें हो गए
बाद मुद्दत हमनें देखी बस्तियां
महल जैसे शामियानें हो गए
जब बदलने ही लगी तकदीर तो
उनके दिल में भी ठिकानें हो गए
आलोक रंजन इंदौरवी
सुन्दर सृजन
ReplyDeleteजी शुक्रिया आभार
Deleteअच्छा है💐💐👌👌👌
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